कूढ़
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कूढ़ ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कुष्टि, प्रा॰, कुड़ढि]
१. हल का वह भाग जिसके एक सिरे पर मुठिया और दूसरे पर खोंपी होती है । जाँघा । हलपत । परिहत । बोने की वह प्रथा जिसमें हल की गरारी में बीज ड़ाला जाता है । छोंटा का उलटा । विशेष—जब खेत में तरी कम रह जाती है तब रबी की फसल इसी तरह बोई जाती है । गेहूँ, तीसी आदिकी बोवाई भी इसी तरह होती है ।
कूढ़ ^२ वि॰ [सं॰ कु + ऊह = कूह, पा॰, कूध अथवा कुष्ठ] नासमझ । अज्ञानी । बेवकूफ । यौ॰—कूढ़मग्ज ।