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कृच्छ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कृच्छ वि॰ [सं कृच्छा = कष्टसाध्य]

१. कष्टसाध्य । उ॰— तेज के प्रताप गात कृच्छहू लखात नीको दिपत चढ़ायों सान हीरा जिमि छीनी है ।— शकुंतला॰ पृ॰ ११० ।

कृच्छ ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. कष्ट । दु:ख ।

२. पाप ।

३. मूत्रकृच्छ्र रोग ।

४. कोइ व्रत जिसमें पंचगव्य प्राशान कर दुसरे दिन उपवास किया जाय । जैसे, कृच्छ्रसांतपन ।

कृच्छ ^२ वि॰

१. कष्टसाध्य ।

२. कष्टयुक्त ।

३. दुष्ट । बुरा (को॰) ।

४. पापी । पापात्मा [को॰] ।