कृष्णकर्म
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कृष्णकर्म संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. हिंसा आदि पापपूर्ण कर्म ।
२. वह कर्म जो बिना फल की कामना के किया जाय ।
२. फोड़े की चिकित्सा की एक प्रक्रिया ।
कृष्णकर्म संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. हिंसा आदि पापपूर्ण कर्म ।
२. वह कर्म जो बिना फल की कामना के किया जाय ।
२. फोड़े की चिकित्सा की एक प्रक्रिया ।