केँचुल
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]केँचुल संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कञ्चुक] [वि॰ केँचुली] सर्प आदि के शरीर पर की खोल जो प्रति वर्ष आपसे आप पृथक् होकर गिर जाती है । उ॰—निज केँचुल मिस धरत है, फाहा तरु ब्रन पास ।—भारतेंदु ग्रं॰, भा॰२, पृ॰ २२१ । क्रि॰ प्र॰—छोड़ना ।—झगड़ना ।—बदलना । मुहा॰—केँचुल बदलना = पोशाक बदलना । कपड़ा बदलना ।— (व्यंग्य) । केँचुल में आना या भरना=केंचुल छोड़ने पर होना ।