केतुपताका
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]केतुपताका संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] फलित ज्योतिष के अनुसार नौ कोष्ठों का एक चक्र जिससे वर्षेश निकाला जाता है । विशेष—इस चक्र में नवों ग्रह, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, शनि, वृहस्पति, राहु, शुक्र, केतु क्रम से रके जाते हैं । फिर कृत्तिका से लेकर भरणी तक और सूर्य से लेकर शुक्र तक प्रत्येक ग्र ह के कोठे में तीन तीन अक्षर लिखे जाते हैं । इस प्रकार जन्म- नक्षत्र से वर्षेश का निश्चय किया जाता है । वर्षेश के वर्ष में अन्य ग्रहों का अंतर्दिन होता है । इसका भी प्रचार बंगाल में अधिक है ।