केवा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]केवा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कुव = कमल] कमल कली । उ॰— (क) तोहि अलि कीन्ह आप भा केवा । हौं पठवा गुरु बीच परेवा ।— जायसी (शब्द॰) । (ख) स्वर्ग सूर भुई सरवर केवा । बनखंड भवँर होय रस लेवा । — जायसी (शब्द॰) ।
केवा ^२ संज्ञा पुं॰ [ सं॰ किंवा ] बहाना । मिस आनाकानी । संकोच । उ॰— रघुराज कौनहू विसंच नहिं होन पैहै, खासे खासे खुसी खेल खूब खेलवैहौं मैं । केवा जनि कीजै मीरि सेवा सब भाँति लीजै, मीठ मीठ मेवा लै कलेवा करवैहों मै । — रघुराज (शब्द॰) ।