केसर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

केसर ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. बाल की तरह पतले पतले वे सींकै जो फुलों के बीच रहते हैं । किंजल्क । विशेष — यह दो प्रकार का होता है । एक वह जो घुंडी के किनारे किनारे होता है और जिसमें नोक पर छोटे, चिपटें दाने होते हैं । इसमें पराग रहता है और यह 'परागकेसर' कहलाता है । दूसरा वह जो घुडी के बीच में होता है । इसमें पराग नहीं होता और यह 'गर्भकेसर' कहलाता है ।

२. एक प्रकार के फूल का बीच का पतला सींका या केसर जिसका पौधा बहुत छोटा होता है और पत्तियाँ घास की तरह लंबी और पतली होती हैं । विशेष — केसर का पौधा स्पेन, फारस, कश्मीर, तिब्बत और चीन में होता है । कश्मीर का केंसर रंग में सर्वोंत्तम माना जाता है और स्पेन का सुगंध में । इसका फूल बैगनी रंग की झाई लिए बहुत रंगों का होता है और पौधे में फूल निकलने के बाद पत्तियाँ लगती हैं । प्रत्येक फूल में केवल तीन केंसर होते हैं, इसीलिये आधी छटाँक असल केसर के लिये प्रायः चार हजार फूलों की आवश्यकता होती है । केसर निकाल लेने के बाद फूल को धूप में सुखाकर हलकें डंडों से कूटते हैं और तब उसे किसी जलभरे बरतन में डाल देते हैं । उसमें से जो अंश नीचे बैठ जाता है, वह 'मोंगला' कहलाता है और मध्यम श्रेणी का केसर होता है । जो अंश जल में न डूबकर पानी के ऊपर रह जाता है, बह फीर सूखकर और कूटकर पानी में डाला जाता है । इस बार जो केसर जल में डूब जाता है, वह निकृष्ट श्रेणी का होता है और 'नीबल' या 'निर्बल' कहलाता है । केसर का पौधा विशेष प्रकार की ढालुआँ जमीन में होता है, जो इसी कार्य के लिये आठ बर्ष पहले से बिलकुल परती छोड़ दी जाती है । इस पौधे की गाँठों से चौदह वर्ष तक फूल निकलते रहते हैं । इसके फूल कातिक में लगते और संग्रह किए जाते हैं । केसर बहुत ही सुगंधित और गरम होता है और खाने पीने की चीजों मे सुगंध के लिये डाला जाता है । केसर का रंग देखने में गहरा लाल होता है, पर पीसने पर पोला हो जाता है । वैद्यक में केसर को सुगंधित, तिक्त, उष्णवीर्य, रुचिकारक, कांतिवर्द्धक, कंडुनाशक, विरेचक और कास, वायु, कफ, कृमि तथा त्रिदेष का नाशक माना है । डाक्टरी मत मे यह ज्वर और यकृत् का नाशक और रजोनिस्सारक है, पर आजकल के कुछ नए डाक्टर इसका कोई गुण स्वीकार नहीं करते । पर्या॰—काश्मीरजन्म । अग्निशिख । पीतन । रक्त । संकोच । पिंडन । लौहित चंदन । चारु । रुधिर । शठ । शोणित । अरुण । काँत । खल । रज । दीपक । सौरभ । चंदन ।

३. घोडें, सिंह आदि जानवरों की गरदन पर के बाल । अयाल ।

४. नागकेसर ।

५. बकुल । मौलसिरी ।

६. पुन्नाग ।

७. हींग का पेड़ ।

८. एक प्रकार का विष ।

९. स्वर्ग ।

१०. कसीस ।