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कोँढ़ा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कोँढ़ा संज्ञा पुं॰ [सं॰ कुण्ड़ल] धातु का वह छल्ला या कड़ा जिसमें जंजीर या और कोई वस्तु अटकाई जाती है ।

कोँढ़ा ^२ वि॰ [हिं॰ कोंढ़ा + हा (प्रत्य॰)] (रुपया) जिसमें कोंढ़ा लगा हो या जिसमें कोंढ़ा लगे रहने का चिह्न हो । विशेष— इस देश में रुपयों में छेद करके उनकी माला पिरोकर स्त्रियों और बच्चों को पहनाते हैं । ऐसे रुपयों को माला में से निकालकर बाजार में चलाने से पहले उनके छेद चाँदी से बंद कर देते हैं । इस प्रकार के रुपयों को कोंढ़ा या कोड़हा कहते हैं ।

कोँढ़ा † संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कोष्ठ] मुँहबँधी कली । अनखिली कली ।