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कोड़ार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कोड़ार संज्ञा पुं॰ [सं॰ कुण्डल] लोहे का एक प्रकार का गोल बंद जो कोल्हू की लकड़ी के चारो ओर इसलिए जड़ा होता है जिसमें वह फट न जाय । पश्चिम में इसे चरस कहते है । कुंडरा । तौक ।