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कोपक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कोपक संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह लाभ, जो मंत्रियों के उपदेश से या राज- द्रोही मंत्रियों के अनादर से हुआ हो । विशेष—कौटिल्य ने कहा हौ कि पहली अवस्था में मंत्री यह सम— झने लगते हैं कि हम न होते तो राज्य की बहुत हानि हो जाती; और दूसरी अवस्था में शेष मत्री यह समझते हैं कि जहाँ हमने लाभ न पहुँचेगा, वहाँ हमारा नाश होगा ।