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कोलपार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कोलपार संज्ञा पु॰ [देश॰] मझौले कद का एक प्रकार का वृक्ष । विशेष—यह बराबर और दारजिलिंग की तरातियों में होता है । इसमें एक प्रकार की कलियाँ लगती है, जिनका मुरब्बा बनता है । जिसकी लकड़ी मजबूत होती है और खेती के औजार बनाने और इमारत के काम में आती है । चीरने के समय लकड़ी का रंग अँदर से गुलाबी निकलता है; पर हवा लगने से वह काला हो जाता है । इसे सोना भी कहते हैं ।