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कोशाभिसंहरण

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कोशाभिसंहरण संज्ञा पुं॰ [सं॰] खजाने की कमी पूरा करना । विशेष—चाणक्य ने इसके कई ढंग बताए हैं, जैसे—(१) बाकी राजकर को एकदम वसूल करना । (२) धान्य का तृतीय या चतुर्थ अंश टैक्स में लेना ।

३. सोने, चाँदी के उत्पादक, व्यापारियों, व्यवसायियों तथा पशुपालकों से भिन्न भिन्न ढंग पर राजकर लेना । (४) मंदिरों की आमदनी में से कर लेना । (५) धनियों के घर्रौ से धन गुप्त दुर्तों द्वारा चोरी करके प्राप्त करना ।