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कौंपु

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शब्दसागर

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कौंपु ^२ प्रत्य॰ [हि॰] कर्म, संप्रदान और संबंध कारक का विभक्ति प्रत्यय । उ— (क) चतुर्भुजदास वाद करते और पंडितन कौ जोत लेते । — अकबरी॰, पृ॰ ३८ । (ख) खंजरीट मृग मिन विचारति, उपमा कौ अकुलाति । चंवल चारु चपल अवलोकनि, चितहिं न एक समाति । — सुर॰ १० । १८११ । (ग) रावन अरि कौ अनुज विभीषन ता को मिले भरत नाई । सुर॰, १ । ३ ।