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कौकुव्यातिचार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कौकुव्यातिचार संज्ञा पुं॰ [ सं॰ काकूवत्यातिचार] वह वाक्य जिसके कहने, बोलने या पढने से अपने या औंरों के मन में काम, क्रोध आदि उत्पन्न हों । जैसे, श्रृंगार के कवित्त, बारहमासा आदि—(जैन) ।