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कौञ्च

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कौंच ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कौण्व] हिमालय का एक अंश । क्रौंच पर्वत [को॰] ।

कौंच ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कच्छु]

१. सेम की तरह की एक बेल । केवाँच ।

२. ईस बैल की फली । विशेष — इस लता में सेम की सी पतियाँ, फुल और फलियाँ लगती हैं । सेम की फलियों से कौंच की फलियाँ अधिक गोल, बडी, गूदेदार और रोएँदार होती हैं । कौंच तीन प्रकार की होती है — भूरी, काली और सदफे । भूरी और काली फलियाँ रोएँतार होती हैं, सफेद बिना रोएँ की होती हैं । काली और सफेद तरकारी के काम में आतीं हैं, भूरी का अधिकतर व्यवहार औषध में होता है और इसके भूरे और चमकदार रोयों के शरिर में लगने से खुजली और सुजन होती है । वैद्यक में कींच अत्यंत वीर्यवर्द्धक, पुष्ट, मधुर और वातघ्न मानी जाती है । इसके बीज बाजीकरण औषधों में पडते हैं । पर्या॰— कपिकच्छु । आत्मगुप्ता । शुकशिंबी । कंडूरा । सद्य: शोथा । शुका । शुकवती । ऋषभ । जटा । गात्रभंगा । प्रावृषा । बानरी । लांगली । कुंडली । रोमवल्ली । वृष्या , इत्यादि ।

कौंच ^२ संज्ञा [अं॰ कोच] दै॰ 'कोच' । उ॰— बढिया साटन की मढी हुईं सुनहरी कौंच । — श्रीनिवास ग्रं॰, पृ॰ १७७ ।