कौतिग
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विलक्षण और अदभुत बात । कौतुक
उदाहरण
[सम्पादित करें]घर का गुसाई चाहै काहे न बँधौ जौरा।—गोरखनाथ।
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कौतिग † संज्ञा पुं॰ [हिं॰ कौतुक] विलक्षण और अदभुत बात । कौतुक । उ॰— देखत कछु कौतिगु इतै देखौ नैक निहारी । कब की इक टक डटि रही तटिया अँगरिन फारि । — बिहारी ( शब्द॰) ।