क्रत्वर्थ
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]क्रत्वर्थ संज्ञा पुं॰ [सं॰] यज्ञों अर्थोवाद और विधान जो पुरुषार्थ की़ भाँती कर्ता के इच्छा के अनुसार नहीं, बल्कि शास्त्र के नियम से अनुकूल होता है । जैसे—पौर्ण मास आदि यज्ञों में फल की लिप्सा या अपनी इच्छा से प्रवृत्ति होती है और इस यज्ञ या उसकी फलविधि को पुरुषार्थ कहते हैं । पर उसमें प्रवृत्त होने पर वत्स्यपाकरण, गोदोहन और उपवास आदि यज्ञ के अंग प्रत्यंग संबंधी कर्मों को शास्त्र की विधि और अर्थवाद के अनुकुल ही करना पडता है । इसी विधि और अर्थवाद को क्रत्वर्थ कहते हैं । संपूर्ण यज्ञ जिस निमत्ति किया जाय, वह फलविधि है, और यज्ञ का एक एक अंग, जिस प्रयोजन से किया जाय, वह अर्थवाद है ।