खड़ना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]खड़ना ^१पु † क्रि॰ अ॰ [सं॰ खेटन, प्रा॰ खेटणउ] चलना । गमन करना । उ॰—(क) ढोलउ पूगल पंथसिरि आणँद अधिक खड़ंति ।—ढ़ोला॰, दू॰ ४२३ । (ख) पहला दल पेशोर थी, खड़ आया लाहौर ।—रा॰ रू॰, पृ॰ २६ ।
खड़ना ^२पु † क्रि॰ स॰ चलाना । चलने के लिये प्रेरित करना । हाँकना । उ॰—(क) इसवर सीय सेस चढ़े रथ ऊपर । तहक सारथी खड़े तुरंग ।—रघु॰ रू॰, पृ १०९ । (ख) खेता सर फिर राव खिसांणौ । वल खड़िया देखवा सिवाँणो ।—रा॰ रू॰, पृ॰ ६२ ।