खर्ज
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]खर्ज पु संज्ञा पुं॰ [हिं॰ खरज] दे॰ 'खरज', 'षडज' । उ॰—तब लीनी कर कंजनि मुरली । खर्जादिक जु सप्त सुर जु रली ।— नंद ग्रं॰, पृ॰ ३१७ ।
खर्ज पु संज्ञा पुं॰ [हिं॰ खरज] दे॰ 'खरज', 'षडज' । उ॰—तब लीनी कर कंजनि मुरली । खर्जादिक जु सप्त सुर जु रली ।— नंद ग्रं॰, पृ॰ ३१७ ।