खवा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]खवा संज्ञा पुं॰ [सं॰ स्कन्ध, प्रा॰ खंध] कंधा । भुजमूल । उ॰—(क) कच समेटि कर भुज फलटि खए सीस पट टारि । काको मन बाँधे न यह जूरो बाँधनिहारि ।—बिहारी (शब्द॰) । (ख) माधव जी आवनहार भये । अचल उड़त मन होत गहगहो फर— कत नैन खए ।—सूर (शब्द॰) । (ग) खए लगि बाह उसारि उसारि । भए इतउत्त जबै रिस धारि ।—सूदन (शब्द॰) । मुहा॰—खवे से खवा छिलना = (बहुत अधिक भीड़ के कारण) कंधे से कंधा छिलना ।