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खाँगना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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खाँगना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ खञ्ज = खोंड़ा] लँगड़ा होना या चलने में असमर्थ होना ।उ॰— हौं अब कुशल एक पैमांगउ । प्रेम पंथ संत बाँधि न खाँगउँ ।—जायसी (शब्द॰) ।

खाँगना ^२ † क्रि॰ अ॰ [सं॰ क्षीण, हि॰ छीजना] कम होना । घटना । उ॰— कहहु सो पीर काह बिनु खाँगा । समुद सुमेरु आव तुम माँग ।—जायसी ग्रं॰ पृ॰, ४९ ।