खाई

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

खाई संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ खानि, प्रा॰, खाई]

१. वह नहर जो किसी गाँव, किले, बाग या महल आदि के चारों ओर रक्षा के लिये खोदी गई हो । उ॰—कबीर खाई कोट की पानी पिवै न कोय । जाय मिलै जब गंग से सब गंगोदक होय ।—संत- बानी, भा॰, १, पृ॰ ३० ।

२. खंदक । उ॰— चहूँ ओर फिरि आई । जिन देखो तिन खाई । (खाई की पहेली ।) —खुसरो (शब्द॰) ।

३. युद्धक्षेत्र में सुरक्षार्थ खोदे जानेवाले गड्ढे जिनमें छिपकर अपनी रक्षा और शत्रु पर आक्रमण किया जाता है । अँगरेजी में इसे 'ट्रेंच' कहते हैं ।