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खिरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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खिरना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ क्षरण ]

१. नष्ट होना । मिटना । उ॰—जे अक्खर खिरि जाहिगे ओहि अक्खर इन महिं नाहि । —कबीर ग्रं॰, पृ॰ ३१० ।

२. गिरना । चुना । बिखरना । झरना । उ॰—(क) मेहाँ बूँठा अन बहल थल तादा जल रेस । करसण पाका, कण खिरा, तद कउ वलण करेस । —ढोला॰, दू॰ २६४ । (ख) केहर कुंभ बिदारियौ गज मोती खिरियाह ।—बांकी॰ ग्रं॰, भ॰

१. पृ॰ १८ ।