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खिसाना

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शब्दसागर

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खिसाना †पु क्रि॰ अ॰ [हिं॰ ] दे॰ 'खिसियाना' । उ॰— (क) दुरि गए कीर कपोत मधुप पिक सारंग सुधि बिसरी । उड- पति विद्रुम बिंब खिसान्यो दामिनि अधिक डरी । — सूर (शब्द॰) । (ख) करैह उपाय पात लता भूमि गाडै पाइ, रहे वे खिसाइ कहयौ इतनोइ लीजिए । — प्रिया॰ (शब्द॰) । (ख) तिन मधि कौ रानौ । हो रानो पै निपट खिसानौ ।— नद॰ ग्रं॰ पृ॰ ३०९ ।

खिसाना ^२पु क्रि॰ स॰ [हिं॰ खिसकाना ]

१. सरकाना । हटाना । उ॰— तो मो चरण खिसावै ताराँ सो वारै ते दीधी सीता ।—रघु॰ रु॰, पृ॰ १८० ।

२. हटाना । भगाना । उ॰— ख्वाजे मीराँ पीर खेत अजमेरि खिसाए । — ह॰ रासी, पृ॰ ७३ ।