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खीप

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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खीप संज्ञा पुं॰ [देश॰]

१. एक प्रकार का घना सीधा पेड । उ॰— खीप पिंडारु कोमल भिंडी । — सूर (शब्द॰) । विशेष—यह सिंध, पंजाब, राजपूत और अफगानिस्तान की पथरीली और बलुई जमीन में होता है । इसकी पत्तियाँ छोटी और लंबोतरी होती हैं और ईसमें जाडे के दिनों में छोटे लंबे फूल निकलते हैं । इसकी पत्तियां और टहूनियां शीतल होती हैं और राजपूताने में चारे के काम में आती हैं । पंजाब में इसके रेशे से रस्सियाँ बनाई जाती हैं ।

२. लज्जालु । लजाधुर ।

३. गंधप्रसारिणी । गंधपसारा ।