गंड़

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

गंड़ संज्ञा पुं॰ [दे॰ गण्ड़]

१. कपोल । गाल ।

२. कनपटी ।

३. गाल से कनपटी तक का भाग । यौ॰—गंड़देश । गंड़पिंड़ । गंड़प्रदेश । गंडमंडल । गंडस्थल । गंड़स्थली = कनपटी । गाल ।

४. ज्योतिष के अनुसार ज्येष्ठा, श्लेष्पा और रेवती के अंत के पाँच दंड़ और मूल, मघा तथा अश्विनी के आदि के तीन दंड़ । विशेष—इसमें उत्पन्न होनेवाले लड़के को दुषित मानते हैं । लोगों का विश्वास है कि गंड में उत्पन्न लड़के का मुँह पिता को नहीं देखना चाहिए । दिन में ज्येष्ठा और मूल का गंड़, रात में श्लेषा और मद्य का गंड़ तथा सायंकाल, प्रातःका ल रेवती और अश्विनी का गंड अधिक दोषकारक माना जाता है; और इनमें उत्पन्न बालक क्रम सें पिता, माता, और अपना घातक माना गया है ।

५. गंडा जो गले में पहना जाता है ।

६. फोड़ा ।

७. चिह्न । लकीर । दाग ।

८. गोल मंहलाकार चिह्न या लकीर । गण्ड़ी । गंड़ा ।

९. गाँठ । ग्रंथि । (लाक्ष॰, शरीर की नाड़ी) । उ॰— नव गज दस गज गज उगनीसा पुरिया एक तनाई । सात सूत दे गंड बहत्तरि पाट लगी अधिकाई ।—कबीर॰ ग्र॰, पृ॰ १५३ । १० गैंड़ा ।

११. बीथी नामक नाटक का एक अंग जिसमें सहसा प्रश्नोत्तर होते हैं ।

१२. घेघा (को॰) ।

१३. योद्धा । (को॰) ।