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गंधाबिरोजा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गंधाबिरोजा संज्ञा पुं॰ [हिं॰ गंध + बिरोजा] चीर नामक वृक्ष का गोंद जो फारस से आता है । विशेष—शीराज और किरमान इसके लिये प्रसिद्ध स्थान हैं । यह तीन प्रकार का होता है—खसनिब जो लेवान्ट से आता है, बिरोजा खुश्क और बिरोजा गावशीर या जवाशीर । बिरोजा या गावशीर पीले रंग का गोंद है, जो बहुत पतला होता है । यह कभी-कभी हरापन लिए भी होता है । इसमें ड़ंटल, फूल और पत्तियाँ मिला रहती हैं । इसकी गंध बुरी नहीं होती और इसका स्वाद कड़ुवा होता है । यहाँ इसे शुद्ध करते हैं और इससे खींचकर बिरोज का ते ल निकालते हैं । मिट्टी के तेल में से भी इसका तेल निकाल जाता है । यह औषध में बहुत काम आता है । इसका शोधा हुआ सत्त निकालकर दवा में मिलाते हैं और मरहम बनाकर फोड़े आदि पर भी लगते हैं । खुश्क बिरोजे में ताड़पीन के ऐसी गंध आती है । इसे कुंदुरु भी कहते हैं । यह हिमालय और शिवालक पर्वतों के जंगल से भी आता है । इसे गंधाभिरोजा, सरल का गोंद, चंद्रस भी कहते हैं । पर्या॰—श्रीवास । श्रीवेष्ट । वृक्षधूपक । क्षीपिष्ट । पद्मदर्शन । नृकधूप । यास । वायस । चितागंध । श्रीरम । धूपांग । तिलपर्ण ।