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गंधाष्टक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गंधाष्टक संज्ञा पुं॰ [सं॰] आठ गंधद्रव्यों के मिलाते से बना हुआ एक संयुक्त गंध जो पूजा में चढ़ाने और यंत्रादि लिखने के काम में आता है । अष्टगंध । विशेष—तंत्र के अनुसार भिन्न-भिन्न देवताओं के लिये भिन्न- भिन्न गंधाष्टक का विधान पाया जाता है । तंत्र में पंचदेव प्रधान हैं । उन्हीं के अंतर्ग सब देवता माने गएँ हैं; अतः गंधाष्टक भी पाँच यही हैं । शक्ति के चंदन, अगर, यकपूर, चोर, कुकुम, रोचन, जटामासी, कपि विष्णु के लिये चंदन, अगर, ह्रीवेर, कुट, यकुंकुम, उशीर, जटामासी और मुर; शिव के लिये चंदन, अगर, कपूर, तमाल, जल, कुंकुम, कुशीद, कुष्ट; गणेश के लिये चंदन, चोर, अगर, मृग और मृगी का मद, कस्तूरी, कपूर; अथवा चंदन, अगर, कपूर, रोचन, कुंकुम, मद; रक्तचंदन, ह्रीवेर; सूर्य के जल, केसर कुष्ठ, रक्तचंदन, चंदगन, उशीर, अगर, कपूर ।