गजशुण्ड़ी
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]गजशुंड़ी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ गलशुणड़ी]
१. जीभ के आकार का मांस का एक छोटा टुकड़ा जो प्राणियों के अंदर जीभ की जड़ के पास होता है । छोटी जबान या जीभ । जीभी । कौआ । विशेष—शब्द का उच्चारण करने में यह प्रधान सहायक है । इसके श्वास की नलियों की रक्षा होती है और उनमें खाने पीने की चीजें नहीं जाने पातीं । पुरुषों में यह अंश आध इंच से कुछ बड़ा और स्त्रियों में कुछ छोटा होता है । बाल्यावस्था में यह बहुत छोटा रहता है; पर युवावस्था में दो तीन वर्षो के अंदर ही इसका आकार दूना या तिगुना हो जाता है । युवावस्था में जो आवाज कड़ी हो जाती है और जिसे 'कंठ फूटना' कहते हैं, उसका प्रधान कारण इसी के रूप और आकार का परिवर्तन है । कुछ पशुओं में यह बहुत नीचे की ओर फेफड़े की नलियों के पास होता है । साधारणतः पक्षियों में दो और कभी कभी तीन तक गलशु ड़ियाँ होती है ।
२. एक रोग । विशेष—इसमें कफ और रक्त के विकार के कारण तालू की जड़ में सूजन हो जाती है और खाँसी तथा साँस की अधिकता हो जाती है ।