गटना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]गटना † क्रि॰ अ॰ [सं॰ ग्रन्थन, प्रा॰ गंठन] गँठना । बँधना । उ॰— हृदय की कबहूँ न पीर घटी । बिनु गोपाल विथा या तनु की कैसे जात कटी । अपनी रुचि जितही तित खैंचति इंद्रिय ग्राम गटी । होति तहीं उठि चलति कपट लगि बाँधे नयन पटी ।— सूर (शब्द॰) ।