गटी
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]गटी स्त्री॰ संज्ञा [सं॰ ग्रन्थि, पा॰ गंठि]
१. गाँठ । उ॰—(क) चेटक लाइ हरहिं मन, जब लगि हौं गटि फेंट । साठ नाक उठि भागहिं, न पहिचान न भेंट ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) रंग भरि आये हौ मेरे ललना बातें कहत हौं अटपटी । अति अलसात जम्हात हौ प्यारे पिय प्रगट त्रिया प्रताप छूटत नाहिर अंतर की गटी ।—सूर (शब्द॰) ।
३. गठरी । उ॰— अघ ओघ की बेरी कटी विकटी, निकटी प्रकटी गुरु ज्ञान गटी ।—रामचं॰ पृ॰ ६८ ।