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गरुड़रुत

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शब्दसागर

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गरुड़रुत संज्ञा पुं॰ [सं॰ गरुड़रुत] सोलह अक्षरों का एक वर्ण वृत । विशेष—इसके प्रत्येक चरण में नगण, जगण, भगण, जगण, और तगण तथा अंत में एक गुरु होता है ।—न, ज, भ, ज; त, ग । जैसे,—नजु भज तै गुख्याल निशि वासर रे मना । लहसि न सौर भूलि कहुँ यत्न कीन्हें घना । हरि—हरि के कहे भजत पाप को जूह यों । गरुड़रुतै सुनै भजन सर्प को व्यूह ज्यों ।