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गहबर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गहबर ^१पु वि॰ [सं॰ गह्वर] [क्रि॰ गहबराना॰ घबराना]

१. दुर्गम । विषम । उ॰—नगरु सकल बनु गहबर भारी । खग मृग विपुल सरल नरनारी ।—तुलसी (शब्द॰) ।

२. व्याकुल । उद्विग्न । उ॰—(क) औरै सो सब समाज कुशल न देखों आजु गहबरि हिय कहैं कोसलपाल ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) मुख मलीन हिय गहबर आवे । मान (शब्द॰) ।

३. किसी ध्यान में मग्न या बेसुध । उ॰—सजल नयन गदगद गिरा गहबर मन पुलक शरीर ।—तुलसी (शब्द॰) ।४ भीतर । गह्वर । गर्भ । उ॰—आवति चली कुंज गहबर तें कुँवरि राधिका रूपमढ़ी ।—घनानंद, पृ॰ ४६४ ।