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गारन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गारन ^२ †पु क्रि॰ स॰ [सं॰ गल]

१. गलाना । घुलाना । मुहा॰—तन या शरीर गारना = शरीर गलाना । शरीर के कष्ट दोना । तप करना । उ॰—ब्रज युवतिन मन हरयो कन्हाई ।— रास रंग रस मन रुचि आन्यो निसि बन नारि बुलाई । तब तन गारि बहुत श्रम कीन्हों सो फल पूरन दैन । बेनुनाद रस विवस कराई सुनि धुनि कीनो गौन ।—सूर (शब्द॰) ।

१. नष्ट करना । बरबागद करना । खोना । उ॰—आछो गात अकारथ गारयो । करी न भक्ति श्यामसुंदर सों जन्म हुआ ज्यों हारयो ।—सूर (शब्द॰) ।