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गारी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गारी पु संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ गालि]

१. गाली । दुर्वचन । उ॰—नारी गारी बिनु नहिंबोले पूत करै कलकानी । घर में आदर कादर को सों खीझत रैन बिहानी ।—सूर (शब्द॰) ।

२०. कलंक- जनक आरोप । चरित्र संबंधी लांचन । मुहा॰—गारी आना, पड़ना, लगाना = कलंक लगाना । लांछन लगाना । दाग लगाना । बदनामी होना । उ॰—लोचन लालाच भारी । इनके लए लाज या तन की सबै श्याम सों हारी । बरजत गात पिता पति बांधव अरु कुल गारी । तदपि रहत न नंदनंदन बिनु कठिन प्रकृति हठ धारी ।—सूर (शब्द॰) । †गारी देना = दे॰ 'गारी बकना' । उ॰—चंगुल चेहरा कइलन खेत । बुलबुल अइलन गारी देत । ए बुलबुल तूँ काहें गारी दाल/?/ अपने केत क भूसी ल/?/ हमरी मजुरी द/?/ (बच्चों के गीत) गारी बकना = अपशब्द, अश्लील शब्द कहना । लांछित करना । गारी लगाना = कलंकित करना । दाग लगाना । विं॰ दे॰ 'गाली' ।

३. एक गीत जो विवाह आदि में स्त्रियाँ भोजन के समय गाती हैं । उ॰—जेंवत देहिं मधुर धुनि गारी । लै लै नाम पुरुष अरु मारी ।—तुलसी (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—गाना ।—देना ।