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गार्हप्रत्याग्नि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गार्हप्रत्याग्नि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ गार्हपत्य + अग्नि] छह प्रकार की अग्नियों में से पहली और प्रधान अग्नि । विशेष—परिवार में पीढ़ी दर पीढी इस अग्नि को रखने का विधान है । यज्ञों में पात्रतपन आदि कर्म इसी अग्नि में किए जाते थे । श्रौतसूत्र के अनुसार अग्निहोत्र ग्रहण करने वाले के लिये इस अग्नि का रखना अत्यंतावश्यक है । साधारण भोजन पकाने से लेकर संस्कार तक सभी कृत्य इसी अग्नी में किए जाते हैं । शास्त्रानुसार प्रत्येक गृहस्थ को इस अग्नि की रक्षा करनी चाहिए ।