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गीतिका

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गीतिका संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. एक मात्रिक छंद जिसके प्रत्येक चरण में २६ मात्राएँ होती है, १४ तथा १२ यति होती है और अंत में लघु गुरु होते हैं । उ॰—धन्य श्री वसुदेव देवकि, पुत्र करि जिन पाइया । धन्य यशुमति नंद जिन पय प्याय गोद खिलाइया ।—(शब्द॰) ।

२. एक वर्णिक, छंद जिसके प्रत्येक चरण में सगण, जगण, जगण, भगम, रगण, सगण और लघु गुरु होते है ।

३. गीत । गान । गायन ।