सामग्री पर जाएँ

गीत्यार्या

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

गीत्यार्या संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक छंद जिसके प्रत्येकत चरण में ५ नगण और एक लघु होता है । इसे अचलधृति भी कहते हैं ।