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गुणवाद

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गुणवाद संज्ञा पुं॰ [सं॰] मीमांसा में अर्थवाद का एक भेद । विशेष—कुमारिल के अनुसार अर्थवाद तीन प्रकार का है, गुणवाद, अनुवाद और भूतार्थवाद । जहाँ विशेषण और विशेष्य का एक में अन्वय करने से ठीक अर्थ महीं सिद्ध होता वहाँ विशेषण का कुछ दूसरा अर्थ कर लेते हैं और उसे अंगकथन या गुणवाद कहते हैं । जैसे—यज्ञमानः प्रस्तरः । प्रस्तर शब्द का अर्थ है कुशमुष्टि । यहाँ विशेषण और विशेष्य के द्वार कोई अर्थ नहीं निकलता इससे प्रस्तर का कुशमुष्टिधारी अर्थ कर लिया गया ।