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गुप्तमार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गुप्तमार संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ गुप्त + हिं॰ मार]

१. ऐसा आघात जिसका शरीर पर कुछ चिह्न न रहे । ऐसी मार जिससे शरीर से रक्त आदि न निकले, जैसे, घूँसे, थप्पड़ आदि की । भीतरी मार ।

२. छिपा हुआ दाँवपेंच । ऐसा अनिष्ट जो बहुत छिपाकर किया जाय ।