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गुरुतल्प

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गुरुतल्प संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. विमाता से गमन करनेवाला पुरुष । विशेष—मनु ने ऐसे पुरुष को महापातकी लिखा है और उसके लिये यही प्रायश्चित्त या दंड लिखा है कि वह या तो लोहे की जलती हुए बरतन में सोकर या लोहे की जलती हुई स्त्री का आलिंगन करके मर जाए ।

२. गुरु की शैया (पत्नी) (को॰) ।