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गेयपद

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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गेयपद संज्ञा पुं॰ [सं॰] नाटयशास्त्र के अनुसार लास्य के दस अंगों में से एक । वीणा या तानतूरा आदि यंत्र लेकर आसन पर बैठे हुए केवल गाना ।