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ग्रामकूट

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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ग्रामकूट संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. शूद्र ।

२. गाँव का मुखिया या चौधरी । विशेष—कौटिल्य के समय में इनके पीछे भी गुप्तचर रहते थे । इनकी ईमानदारी की जाँच करते रहते थे ।