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घरहाँई

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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घरहाँई ^१ पु संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ घर + सं॰ घानी > हिं॰ घाई]

१. घर घालनेवाली । घर में विरोध करानेवाली स्त्री । इधर का उधर लगानेवाली । चुगुलखोर स्त्री ।

२. वह स्त्री जो किसी के घर की बुराई सबसे कहती फिरे । अपकीर्ति फैलानेवाली । निंदा फैलानेवाली । लांछन लगानेवाली । चबाव करनेवाली । उ॰—(क) घरहाई चवाव न जो करतीं तो भलो औ बुरो पहिचानती मैं ।—हनुमान कवि । (शब्द॰) । (ख) घरहाइन की घैरु हू लाज न सकी बचाय । अरी हरी चित लै गयो लोचन चारु नचाय ।—श्रृ॰ सत॰ (शब्द॰) । (ग) घरहाइन चरचैं चलैं चातुर सैन । तदपि सनेह सने लगैं ललकि दुहूँ के नैन ।—श्रृ॰ सत॰ (शब्द॰) ।

घरहाँई ^२ पु † वि॰ बदनामी फैलानीवाली । कंलक की बात चाचो ओर कहनेवाली । चववाइन । चुगुलखोर । उ॰—ये घरहाईं लुगाई सबै निस द्यौस नेवाज हमै दहती हैं । प्राण पियारे तिहारे लिये सिगरे ब्रज को हँसिबो सहती हैं ।—नेवाज (शब्द॰) ।