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घिरत

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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घिरत पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ घृत] दे॰ 'घृत' । उ॰—(क) घेरत अति घिरत चभोरे । लै खाँड़ सरस बोरे ।—सूर॰, १० । १८३ । (ख) साह की बातैं सुणैं त्यों उमंग प्रकासै । घिरत का कुंभ सींचै होम ज्याँ उजासै ।—रा॰ रू॰, पृ॰ ११९ ।