घुन
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]घुन संज्ञा पुं॰ [सं॰ घुण] एक प्रकार का छोटा कीड़ा जो अनाज, पौधे और लकड़ी आदि में लगता है । विशेष—इस कीड़े की कई जातियाँ होती हैं । लकड़ी का घुन अनाज के घुन से भिन्न होता है । जिस लकड़ी या अनाज में यह लगता है, उसे अंदर ही अदर खाते खाते खोखला कर डालता है । इस कीड़े के भी रेशम के कीड़ी के समान कई रूपांतर होते हैं । यह भी पहले गंडेदार लबे ढोले के रूप में रहता है । मुहा॰—घुन लगाना=(१) घुन का अनाज या लकड़ी को खाना । (२) अदर ही अंदर किसी वस्तु का क्षीण होना । धीरे धीरे अप्रत्यक्ष रूप में किसी वस्तु का ह्रास होना । अदर ही अंदर छीजना या नष्ट होना । जैसे,—शरीर में घुन लगना । रोजगार में घुन लगाना । जवानी में घुन लगना । उ॰—कीट मनोरथ दारु शरीरा । जेहि न लाग घुन को अस धीरा ।—मानस, ७ ।७१ । घुन झड़ना=घुन की खाई हुई लकड़ी का चूर गिरना ।