घेरघार
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]घेरघार संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ घेरना]
१. चारों ओर से घेरने या छा जाने की क्रिया । जैसे, — बादलों की घेरघार देखने से जान पडता है कि पानी बरसेगा । उ॰— सब ओर सन्नाटा इस पर बादलों की घेरघार, पसारने पर हाथ भी नहीं सूझता ।— ठेठ, पृ॰ ३२ ।
२. चारों ओर का फैलाव । विस्तार ।
३. किसी कार्य के लिये किसी के पास बार बार उपस्थित होने का कार्य । किसी के पास जाकर बार बार अनुरोध या विनय करने का कार्य । खुशामद । विनती । जैसे, — बिना घेरघार किए आजकल जगह नहीं मिलती ।