घैया
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]घैया ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ घी या सं॰ घात अथवा देश॰]
१. गाय के थन से निकली हुई दूध की धार जो मुँह लगाकर पी जाय । उ॰— आई छाक अवार भई हैं नैंसुक घैया पिएउ सबरे ।—सूर॰ १ ।४६३ ।
२. ताजे और बिना मथे हुए दूध के ऊपर उतराते हुए मक्खन को काछकर इकट्ठा करने की क्रिया । उ॰—(क) कजरी धौरी सेंदुरी धुमरी मेरी गैया । दुहि ल्याऊँ मैं तुरत ही तू करि दे घैया ।—सूर॰ १० ।७२५ ।
२. किसी पेड़ या लकडी़ आदि को काटने अथवा उसमें से रस आदि निकालने के लिये शस्त्र से पहुँचाया हुआ आघात ।
घैया ^२पु संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ घाई या घा] ओर । तरफ । दिशा । उ॰—सोहर शोर मनोहर नोहर माचि रह्यौ चहुँ घैया ।— रघुराज (शब्द॰) ।