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घ्राणक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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घ्राणक संज्ञा पुं॰ [देश॰] उतना तेलहन जितना एक बार में पेरने के लिये कोल्हु में डाला जाय । घानी । विशेष—इस शब्द का प्रयोग संवत् १००२ के एक शिलालेख में आया है जिसमें लिखा है कि 'हर घ्राणक पीछे नारायणदेव आदि ने एक एक पली तेल मंदिर के लिये दिया' । इस शब्द की व्युत्पत्ति का सस्कृत में पता नहीं लगता, यद्यपि 'घानी' या 'घान' शब्द अबतक इसी अर्थ में बोला जाता है ।