चकवँड़
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]चकवँड़ ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ चक्रमर्द] एक हाथ से डेढ़ दो हाथ तक ऊँचा एक पौधा । पमार । पवाड़ । विशेष—इसकी पत्तियाँ डंठल की ओर नुकीली और सिरे की ओर गोलाई लिए हुए चौड़ी होती हैं । पीले रंग के छोटे छोटे फूलों के झड जाने पर इसमें पतली लंबी फलियाँ लगती हैं । फलियों के अंदर उरद के दाने के ऐसे बीज होते हैं जो खाने में बहुत कड़ुए होते हैं । इसकी पती, जड़, छाल, बीज सब औषध के काम में आते हैं । वैद्यक में यह पित्त वात नाशक, हृदय को हितकारी तथा श्वास, कुष्ट, दाद, खुजली आदि को दूर करनेवाला माना जाता है ।
चकवँड़ ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ चक्र ( = चाक) + भाँड] कुम्हारों का वह बरतन जो पानी से भरा हुआ चाक के पास रखा रहता है । पानी हाथ में लगाकर चाक पर चढ़े हुए बरतन के लोंदे को चिकना करते हैं ।